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27 जुलाई 2020

अर्थशास्त्र :-

अर्थशास्त्र :- 
देखा जाये तो पूर्णतः अर्थशास्त्र को परिभाषित करना लगभग नामुमकिन है। लेकिन हम ये कह सकते है की
अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञानं से जुड़ा एक ऐसा भाग है जो की वस्तुओ और सेवाओं के उत्पादन से लेकर वितरण विनिमय तक का अध्ययन करता है।  इसमें किसी देश की अर्थव्यवस्था में संचालित कार्यो का अध्ययन  किया जाता है ताकि उपलब्ध साधनो का बेहतर उपयोग किया जा सके और विभिन्न स्तरों पर निर्णय लिए जा सके। इसमें वित्त और पूजी निर्माण जैसे बिंदु भी शामिल होते है।

अर्थशास्त्र के प्रकार :- 
अर्थशास्त्र को अध्ययन की दृष्टि से २ भागो में बांटा गया है। 
१.) व्यष्टि अर्थशास्त्र      २.) समष्टि अर्थशास्त्र

१.) व्यष्टि अर्थशास्त्र :- यह अर्थशास्त्र का वह भाग है जिसमे हम किसी देश की अर्थव्यवस्था में मौजूद                                                  व्यक्तिगत और विशिष्ट इकाइयों का अध्ययन करते है। 
२.) समष्टि अर्थशास्त्र :- यह अर्थशास्त्र का वह भाग है जिसमे हम व्यक्तिगत स्तर एवं विशिष्ट इकाइयों का                                        अध्ययन ना करके समस्त इकाइयों का सामूहिक रूप से अध्ययन करते है। 
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26 जुलाई 2020

वितीत विवरण :- अर्थ, प्रकार और उद्देश्य

अर्थ :- वित्तीय विवरणों से आशय ऐसे विवरणों से या सूचनाओं से है, जो किसी न किसी प्रकार से वित्त से जुडी हुई होती है। वित्तीय सूचनाओं को नियमबद्ध तरीके एवं लेखांकन सिद्धांतो के आधार पर क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किये गए विवरण को वित्तीय विवरण कहा जाता है।
प्रत्येक वर्ष के अंत में संस्था कंपनी द्वारा बनाये गए अंतिम खातों को वित्तीय विवरण पत्र कहते है।

प्रकार :-  मुख्यता निम्न प्रकार के वित्तीय विवरण होते है :-
लाभ हानि खाता
चिटठा (बैलेंस शीट)
रोकड़ प्रवाह विवरण
प्रतिधारित आयो का विवरण

उद्देश्य :- निम्न प्रकार के उद्देश्य होते है :-
आगमो एवं लागतो का पता लगाना। 
लाभयकता की स्तिथि का पता लगाना। 
वित्तीय स्तिथि का ज्ञान प्राप्त करना।  
प्रबंधको को उपयोगी सूचनाएं प्रदान करना। 
व्यवसाय की कुशलता का ज्ञान प्राप्त करना। 

वित्तीय विवरणों की उपयोगिता/रूचि वाले पक्षकार :-
1.) उच्च प्रबंध                                    5.) सरकार 
2.) लेनदार                                         6.) आयकर विभाग
3.) बैंक                                              7.) अन्य वर्ग
4.) विनियोजक 

वित्तीय विवरणों की सीमाएं :- 
- प्रदर्शित लाभ वास्तविकता से अलग 
- चिटठा मात्रा दिखावटी प्रपत्र    
- लेखांकन के आसमान आधार 
- भूतकालीन दशाओ पर आधारित
- व्यक्तिगत पक्षपात एवं ज्ञान से प्रभावित



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25 जुलाई 2020

प्रबंधकीय लेखांकन :- अर्थ, और सिद्धांत

परिभाषा :- 
चार्टर्ड इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एकाउंटेंट्स, लंदन :- प्रबंध लेखांकन का अर्थ लेखांकन की सुचना तैयार करने में लगने वाले पेशेवर ज्ञान तथा योग्यता के प्रयोग से से है ताकि प्रबंधको को निति निर्धारित करने तथा व्यवसाय की क्रियाओ के नियोजन एवं नियंत्रण में सहायता हो सके।

कार्य :-
योजना बनाने में सहायक। 
समन्वय बनाने में सहायक।  
निर्णय लेने में सहायता।  
सूचनाओं का विश्लेषण एवं व्याख्या करना।  
नियंत्रण में सहायक।  
अन्य कार्य।

सिद्धांत :-
संसाधनों का कुशल प्रयोग। 
नियंत्रणीय एवं अनियंत्रणीय लागतो का ध्यान। 
भविष्य की और देखने की कोशिश।       
स्त्रोत पर नियंत्रण लेखांकन। 


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24 जुलाई 2020

व्यापार : अर्थ, विशेषताएं और महत्व

व्यापार :- जब भी कभी दो पक्षों के बीच के वस्तुओ और सेवाओं का आदान प्रदान, मौद्रिक प्रतिफल के बदले किया जाता है तो इसे व्यापार कहा जाता है।  दो पक्षों में कोई भी व्यक्ति, फर्म या कंपनी कोई भी व्यक्ति हो सकता है।

विशेषताएं :- 
वस्तुओ और सेवाओं का आदान प्रदान होता है। 
कम से कम दो पक्षों का होना बहुत आवश्यक है।
आवश्यक रूप से सौदे होते है।
मौद्रिक प्रतिफल का तत्व अनिवार्य।

महत्व :-
वस्तुओ या सेवाओं की नियमित पूर्ति।
आवश्यकता की पूर्ति। 
अर्थव्यवस्था के सुचारु रूप से चालन में योगदान।













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21 जुलाई 2020

समष्टि अर्थशास्त्र

समष्टि अर्थशास्त्र

 समष्टि अर्थशास्त्र , अर्थशास्त्र के उस भाग को कहते है, जिसमे बड़े स्तर पर एवं सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था से सम्बन्ध रखने वाली इकाइयों का अध्ययन किया जाता है। इसमें किसी व्यैक्तिक रूप से कार्य न होकर सम्पूर्ण रूप से कार्य संपन्न होता है।
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व्यष्टि अर्थशास्त्र

व्यष्टि अर्थशास्त्र
व्यष्टि अर्थशास्त्र, अर्थशाश्त्र में उसे कहा जाता है, जिसमे व्यैक्तिक अथवा विशिष्ट आर्थिक इकाइयों से सम्बंधित जानकारियों का अध्ययन किता जाता है। जैसी की कोई विशेष व्यक्ति या फर्म आदि। 
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आर्थिक क्रियाएँ

आर्थिक क्रियाएँ :- 
आर्थिक क्रियाओ में वे सभी क्रियाए सम्मिलित होती है, जो किसी भी व्यक्ति के के द्वारा आवश्यकता पूर्ति हेतु
और धन प्राप्त करने हेतु की जाती है। इन क्रियाओ में उत्पादन, वितरण आदि सम्मिलित होते है। आर्थिक क्रियाओ में वित्त तत्व आवश्यक रूप से निहित होता है।
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